In Hindi ~upd~ | Falling Into Your Simile
तुम कहो 'बादल'... और मैं बरसने को तैयार। बिना छतरे के, बिना पूर्वसूचना के। सिर्फ एक उपमान के भरोसे। This piece explores the idea of being so deeply influenced by someone’s poetic way of speaking (their similes) that you literally "fall" into those images—becoming the well, the stitch, the upside-down tree. The speaker loses literal reality and surrenders to the gravitational pull of the beloved’s metaphors, finding freedom not in standing still but in falling endlessly through their language.
पहले मैं सीधी-सादी ज़मीन पर चलता था। बातें सपाट थीं, मौसम पूर्वानुमानित थे। दर्द को 'दर्द' कहता था, खुशी को 'खुशी'। मैं प्रतीकों का भूखा नहीं था, और न ही रूपकों का बोझिल कारवाँ। falling into your simile in hindi
और मैं उस सिलाई में फँस गया। धागा मेरी उँगलियों से बँधता गया, और शरीर की हर तह पर एक अदृश्य कढ़ाई उभर आई। तुम मुझे 'बिना सुई का सीना' सिखा रही थी। यानी दर्द को ऐसे बुनना कि छेद न दिखे, केवल डिज़ाइन दिखे। तुम कहो 'बादल'
अब मैं प्रतिदिन गिरता हूँ। तुम कहती हो 'चाँद'—मैं उस चाँद की दरारों में समा जाता हूँ। तुम कहती हो 'धूल'—मैं उड़कर तुम्हारी पलकों पर बैठ जाता हूँ। तुम कहती हो 'आग'—मैं जलता नहीं, बल्कि ईंधन बनकर तुम्हारे भीतर की लौ को बताता हूँ कि शीतल भी कैसे दहक सकता है। falling into your simile in hindi
तीसरी बार तुम चुप थीं। लेकिन तुम्हारी चुप्पी ने कहा— "हम दो ऐसे पेड़ हैं, जिनकी जड़ें ज़मीन से बाहर बढ़ रही हैं।"